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Tuesday, October 24, 2017

टॆम टळगी

टैम-टैम री बात है,टैम करै मजबूर|
कुण नै भावै खूंसडा,चुगणा बोतल पूर|1|
तेरी मेरी राड मै, राम रट्यो ना बीर|
माटी री आ मूरती,माटी बण्यौ सरीर|2|

Friday, December 30, 2016

Happy new year 2017

रामजी थाने सगळा नै निरोगा राखै
कमाई दुनी चोगुणी बढ़ावे
टाबरिया आपस्यूं भी ऊँचा चढ़े।
घर आळी या घर आळा री मोकळी मेहरबानी रेवे।
घणे हेत सु,घणे कोड सु,महारे हिवङे री घणी हरक सु,
आप ने और आपरे सगले परिवार ने “न्योडा साल” री घणी-घणी शुभकामनाएँ !

Thursday, December 1, 2016

गाँव री थोङी पढोङी छोरी रो लव लेटर

एक गांव री छाेरी आपरे प्रेमी ने लव लैटर लिखियाे---
(बापड़़ी घणी पढाेड़ी ही काेनी)

पर किसी का पत्र पढ़ कर हंसना बुरी बात है।

मेरे प्यारे पपूड़ां,

कल मैने तुम्है देखा।
तुम डागले खड़े मुझे देख रहे थे, मैं लारले बाड़े में टाेगड़िया बांध रही थी।
मैं तुम्हे देख कर मुस्कुराना चाहती थी, तभी तुम्हारे जी सा बान्डा खाेल के बारे आ गए।
मैं जल्दी से थेपड़ी वाले पींडारे के लारे लुक गई।
तेरी बाैत याद आती है।
पर तू रास्ते में जाते समय ऐसी हरकतें ना करिया कर।
कल मैं मां के साथ सैर कानी जा रही थी ताे तुने जाे मुझे कांकरा मारा था, वाे सीधा मां के पिटपड़े पर लगा।
मां ने बाैत गाल्यां काडी।
तू कल मिल रहा है क्या ?
परसाें मैं तेरे घर कानी आ रही थी,
तभी एक मिनड़ी रस्ता काट गई।
ताे मैं पाछी चली गई।
परसाें मैं अपनी भायली के साथ,
पाैटा लेने जा रही थी ताे तूने लारे से हैला क्याे पाड़ा था ?
कभी लारे से हेला नहीं पाड़ना चाहिए।
बाकी फेर कदई लिखूंगी।
अब झाेटी काे नीरा नाखणे का टैम हाेगया है।
पत्र का जबाब जल्दी देना।

                          तुम्हारी
                           धापुड़ी

😂😂😂😂😉😉😜😜😜😜

Saturday, November 26, 2016

मेहा बरस

रिमझिम-रिमझिम मेहा बरसे, काळा बादळ छाया रे। 
पिया सूं मलबां गांव चली, म्हारे पग में पड ग्या छाला रे। 
रिमझिम........ 

भरी ज्वानी म्हांने छोड गया क्यूं, जोबन का रखवाला रे। 
सोलह बरस की रही कुंवारी, अब तो कर मुकलावां रे। 
रिमझिम........... 

घणी र दूर सूं आई सजनवां, थांसू मिलवा रातां रे। 
हाथ पकड म्हांने निकां बिठाया, कान में कर गया बातां रे।

रिमझिम.......

Saturday, October 29, 2016

थोङा दिना पेछ ए शायद कोनी मिलेला

खाणो वाइफ �रो,
पाणी पाइप 🚰रो,
ध्यान एक री,
सलाह दो री,
गावणो तीन रो,
चोकडी चार री,
पंचायती पान्च री,
छाती कुटो छ: रो,
प्यार भाई 👬रो,
नशो दवाई रो,
दूध गाय 🐄रो,

स्वाद मलाई रो,
वेर दुश्मन� रो,
वगार राई रो,
एको नाई रो,
घर लुगाई �रो,
टोन्को दर्ज़ी रो
मेसेज � दमजी रो
न्याय ताकडी �रो,
साग काकडी �रो,
जाल मकडी �रो,
बलितो लकडी �रो,
घी जाट रो,
तेल हाट रो,
तोलणो बाट �रो,
लाडु सुण्ठ रो,
कपडो ऊन 🐏रो,
घाघरो वरी रो,
और नाम बोलो हरी रो। |
💭थोड़ा दिना पछे ए शायद कोनी मिलेला ⌛

Monday, October 3, 2016

""""""तुम्ही तो जग की माता हो""""'""'

मरूधर में दरबार हर पल हो जय जयकार

माँ दधीमथी सरकार तुम करूणा की मूरत हो

तुम्ही तो माँ की सूरत हो......

कर में ले तलवार करती असुरों पर वार

फिर भी नयनों में प्यार माँ तुम सबकी त्राता हो

तुम्ही तो जग की माता हो......

सब देवता सदा ही करते हैं तेरी पूजा

हर मुश्किल दूर कर दे तुझसा ना कोई दूजा

हुए जब जब असुर भारी माँ तूने किया संहार

मरूधर में दरबार.........

तूँ दुर्गा तू ही काली माँ तू ही शेरों वाली

तू कमला महालक्ष्मी माँ ऊँचे डेरों वाली

ब्रम्हाणी, रूद्राणी माँ तेरे रूप हजार

मरूधर में दरबार....

अधरों पे माँ के सोहे मुस्कान कितनी प्यारी

करूणा भरे कजरारे  नयनों की छवी न्यारी

केशर का तिलक माथे नथ का अनुपम श्रिंगार

मरूधर में दरबार...

हम नटखट तेरे बच्चे बस खेलें तेरे अंगना

ममतामयी जगदम्बे ममता की छाँव रखना

है जो तेरा हाथ सिर पे डरने की क्या दरकार

मरूधर में दरबार....

-----दधिमथी माँ माहाराणी लाग-----

बब्बर सिंह प चढी माँ महाराणी लाग

कि म्हान दधीमथी माँ जगदम्बा भवानी लाग

आ तो ब्रम्हाणी रूद्राणी कमलाराणी लाग-कमलाराणी लाग

कि म्हान दधीमथी माँ जगदम्बा भवानी लाग

प्रगटी जद भू फाड़ भवानी हुई गर्जना भारी

घबरायो ग्वाल्यो डर भाग्यो भागी गायाँ सारी

गोठ माँगलोद माँ की रजधानी लाग-रजधानी लाग

कि म्हान दधीमथी माँ जगदम्बा भवानी लाग

केशर तिलक बोरलो माथे नथली रो सिणगार

प्यारी सी आख्याँ म काजल फूलाँ रो गळहार

आ तो ममता री मूरत सुहाणी लाग -रे सुहाणी लाग

कि म्हान दधीमथी माँ जगदम्बा भवानी लाग

दधिमथि माँ रो ध्यान धर भाई जो नर आठूँ याम

उणरी बाधा दूर कर माँ पूर सारा काम

इणर नाम स्यूँ सफल जिंदगानी लाग -रे जिंदगानी लाग

कि म्हान दधीमथी माँ जगदम्बा भवानी लाग

बब्बर सिंह प चढी माँ महाराणी लाग

कि म्हान दधीमथी माँ जगदम्बा भवानी लाग

****मेयाजी म्हें तो टाबर थारा...****

मैयाजी म्हें तो टाबर थारा...मैयाजी म्हें तो टाबर थारा...

ले गोद लडाओ लाड थे पूछो आँसू म्हारा....2

मैयाजी म्हें तो टाबर थारा... मैयाजी म्हें तो टाबर थारा...

दधिमथी माँ महतारी लाज अब राखो म्हारी

घड़ी संकट की आई शरण म्हें आया थारी

हिवड़ा म ऊठ हूक दरश बिन नैण दुखारा...2

मैयाजी म्हें तो टाबर थारा... मैयाजी म्हें तो टाबर थारा...

होठ ज्यूँ मन मन मुळक नैणाँ स्यूँ करूणा छळक

स्वरण नथ हीराँवाली मात मुख चमचम चमक

केशर तिलकाँ पर बोर चूनड़ी जड़्या सितारा...2

मैयाजी म्हें तो टाबर थारा... मैयाजी म्हें तो टाबर थारा...

मुकुट माथा पर सोव रूप सगळाँ न मोव

तेज की ऐसी मूरत चाँद सूरज सुध खोव

चढ सिंह पधारो आज कराँ म्हें दरषन सारा....2

मैयाजी म्हें तो टाबर थारा... मैयाजी म्हें तो टाबर थारा...

जगत का गोरखधंधा रोग सतरासौबीसी

कामना गिणी न जाव भोग नहिं पाँच पचीसी

थे करो दया काटो करमाँ का बन्धन सारा.....2

मैयाजी म्हें तो टाबर थारा... मैयाजी म्हें तो टाबर थारा

******दधिमथी माँ के दर्शन******

दधिमथी माँ बिलखां म्हें तो कद थारा दर्शन पावाँ

इतरी तो कर महर साल म एकर तो मंदिर आवाँ

माॅ इतरी तो कर महर साल म एकर तो मंदिर आवाँ

गोठ मांगलोद बीच बिराज मा दधिमथी कहाव है

दाधीचाँ री कुल देवी पण  सगली जात्याँ आव है

सबकी मंषा पूरण  करणी सगळा थारा गुण गावाँ

इतरी तो कर महर साल म एकर तो मंदिर आवाँ

जोत अखंड जळ मिज मंदिर अधर खम्भ महिमा गाव

इमरत नीर कुण्ड म भरियो देव सिनान करण आव

ध्वजा फरूख असमाना म निरख निरख म्हें हरषावाँ

इतरी तो कर महर साल म एकर तो मंदिर आवाँ

¬

हाथ जोड़ कर कर चाकरी रिद्धि सिद्ध सम्पत सारी

नाच भैंरू गजानन्द बजरंगी भोला भंडारी

ढोल नगाड़ा नौबत बाज शोभा म्हें नहिं कह पावाँ

इतरी तो कर महर साल म एकर तो मंदिर आवाँ

म्हांकी मरजी चल नहीं तूँ चाव जद मिलणो होव

माॅ सलटाव काम घणेरा टाबर पड़्यो पड़्यो रोव

सुण ये माॅ म्हें टाबर थारा तन छोड़ अब सिद जावाँ

इतरी तो कर महर साल म एकर तो मंदिर आवाँ

दधिमथी माँ बिलखां म्हें तो कद थारा दर्शन पावाँ

इतरी तो कर महर साल म एकर तो मंदिर आवाँ

मेया एकर तो दरबार म बुलाय लीजो ए

मैया एकर तो दरबार म बुलाय लीजो ए
माता एकर तो दरबार म बुलाय लीजो ए
म्हान थास्यूं  आस लगी है मैया थास्यूं  प्रीत लगी है
मत ना तोड़ दीजो ए
मैया एकर तो दरबार म बुलाय लीजो ए

जद भी कोई पड़ बीपदा दोड़्यो दोड़्यो आवूँ मैया दोड़्यो दोड़्यो आवूँ

चैत आसोजां र मेला म माँ दूर कियां  रह पावूं मैया दूर कियां  रह पावूं

जळ बिन मछली ज्यूँ  तड़पूं  थे जाण लीजो ए
मैया एकर तो दरबार म बुलाय लीजो ए

थारी महर हो जाव माता  जात जड़ूला ल्यावूँ माता जात जड़ूला ल्यावूँ
सवामणी कर दाल चूरमो बाटी भोग लगावूँ मैया छप्पन भोग सजाऊँ
जागरणो अभिषेक करूं थे किरपा करज्यो ए
मैया एकर तो दरबार म बुलाय लीजो ए

सांझ पड़्यां  टाबरिया थारा हरष हरष गुण गाव मैया हरष हरष गुण गाव
थार पोढण री खातिर माँ  फुलड़ां सेज सजाव मैया फुलड़ां सेज सजाव
पोढण  री बेळ्यां  म्हान परसादी दीजो ए
माता एकर तो दरबार म बुलाय लीजो ए
म्हान थास्यूं  आस लगी है मैया थास्यूं  प्रीत लगी है
मत ना तोड़ दीजो ए
मैया एकर तो दरबार म बुलाय लीजो ए

Sunday, October 2, 2016

माँ दधीमथी गोठ माँगलोद

जगदम्बा जग तारिणी,,मैं धरु तिहारो ध्यान...
आपरे शरणे आविया,,ओ माँ राखिजो सब रो मान...!!!
सुप्रभात... 🙏🙏🙏 ***जय माता दी***

Sunday, November 22, 2015

--------राधे कृष्णा ---------

!!!राधे राधे हरे कृष्णा हरिगं राधे राधे!!

चाकर राखले साँवरिया, तेरो भोत बङो दरबार
भोत बङो दरबार तेरो, भोत बङो दरबार
चाकर राखले.....................
पूरब पश्चिम, उतर दक्षिण, दशो दशा में राज तेरो
राजा और महाराजा तेरे, आगे है लाचार।
चाकर राखले.....................,
तिन लोक चौहद भूवन में, फैल्यो कारोबार तेरो,
यूंगा यूंगा सू सरपट दौङ, श्याम तेरी सरकार।
चाखर राखले.....................,
सीधो सादो, बन्दो मैं तो नेम धेम को पक्को रे,
एेसे चाकर की तो होसी, श्याम तने दरकार रे।
चाखर राखले.....................,
जो सोपणो, काम साँवरा, चाव लगाकर करस्यूँ रे,
अरजी है साँवरिया म्हानै, मोको दे एक बार।
चाकर राखले....................,
जो दैवगो, पून -पाउलो,हँसी खुशी से लस्यूं रे
"नन्दू "थारी रजा में राजी, सेवकियो तैयार रे।
चाकर राखले....................
!!! जय श्री कृष्णा!!!
<==========>

Tuesday, October 13, 2015

" माँ दधीमथी स्तुति "

।। दधिमथी स्तुति ।।

मैया दीज्यो ए परसादी हाथ बढ़ाय बाहर उबा टाबरिया।।टेर।। म्है हां थांरा टाबर मैया तूं है म्हारी माय। क्ुल देवी जगदम्बा अम्बा, लुळ लुळ लागूं पाय।। अम्बा दीज्यो ए चरणामृत अमृत धार...

चरणामृत चरणा को दीज्यो, केशर चन्दन साथ। दूध पतासा मिसरी दीज्यो, मीठा रहसी हाथ। अम्बा दीज्यो ए मेवांरा, भर भर थाल...

अन-धन रा भंडार भरीज्यो, लक्ष्मी दीज्यो अपार। सभी रकम की वस्तु मैया, घर में दीज्यो बसाय। अम्बा दीज्यो ए सोनेरो नौसर हार...

थारं चरणां री भक्ति दीज्यो चोखो दीज्यो ज्ञान। भरी सभा पंचा में मैया, म्हारो राखज्यो मान। मैया दीज्यो ए नैणारी ज्योति अपार...

टाबरियां ने गोद झडूलो, देय बुलाज्यो आप। अत्रि दास शरण मा थांरी, भूल करिज्यो माफ। अम्बा दीज्यो ए, सेवा भक्ति रो सार...

माँ दधीमती गोठ मांगलोद

कपाल पीठ: गोठ मांगलोद.... दधिमन्थन से पैदा हुई दधिमती माता: दूध से होता है जिनका अभिषेक.

हमारी पुण्य भूमि मातृभूमि जो भारत भूमि के नाम से जानी जाती हेै, इसमें सभी तीर्थ स्थान ऐसे हैं जहां जाने से प्रत्येक मनुष्य का तन-मन पवित्र हो उठता हैऔर नवजीवन का संचार होता है। पुराणों में 51 महाशक्ति पीठ व 26 उप पीठों का वर्णन मिलता है, इनको शक्ति पीठ या सिद्ध पीठ भी कहते हैं। इनमें से एक दधिमथी पीठ है, जो कपाल पीठ के नाम से भी जानी जाती है। सम्पूर्ण कामनाओं को पूर्ण करने वाली त्रिनेत्रा भगवती, जो हाथों में चमकीला चक्र, तलवार, धनुष-बाण, अभय मुद्रा, कमल और त्रिशूल धारण किए हुए हैं, जो मोतियों के हार और कुण्डल से युक्त हैं, वह सिंह-वाहिनी वर देने वाली सर्वोत्कृष्टा पूजने योग्य दधिमथी माता सदा मंगल करे।

दधिर्भक्त जनान धात्री मथी तदरिमाथिनी।

देवी दधिमथी नाम धन्वदेशे विराजते।।

देवी का प्राकट्य, मंदिर की स्थिति व निर्माण का वर्णन

दधिमथी का मंदिर पुष्कर अजमेर के उत्तर में 32 कोस पर स्थित है, जो नागौर जिले की जायल तहसील मुख्यालय से 10 किलोमीटर दूर गोठ व मांगलोद गांवों के बीच है।

त्रेता युग में अयोध्यापति राजा मान्धाता ने यहां एक सात्विक यज्ञ किया। उस समय माघ शुक्ला सप्तमी थी, देवी प्रकट हुई, जो दधिमथी के नाम से जानी जाती है। शिलालेख उके अनुसार इसका निर्माण गुप्त सम्वत् 289 को हुआ, जो करीब 1300 वर्षों पूर्व मंदिर शिखर का निर्माण हुआ। सम्वत 608 में 14 दाधीच ब्राह्मणों द्वारा 2024 तत्कालीन स्वर्ण-मुद्राओं से इसका गर्भग1ह व 38 स्तम्भों का निर्माण हुआ।

इतिहास-विशेषज्ञों व पुरातत्व विभाग ने इस मंदिर को लगभग 2000 वर्ष प्राचीन माना है। 1908 के शिलालेख के अनुसार दाधीच-कुलभूषण सिद्व-ब्रह्मचारी बुढादेवल निवासी श्री विष्णुदास जी महाराज की आज्ञा से उदयपुर राजा स्वरूपसिंह जी ने चौक व तिबारे, दरवाजे, यात्री-निवास, बावड़ी, मंदिर आदि का निर्माण करवाया।

देवी के वर्तमान मंदिर की मूर्ति के बारे में कहते हैं कि जब देवी प्रकट हो रही थी, तभी वहां ग्वाला गाय चरा रहा था, जमीन के फटने से वहां गर्जना हुई। उसी के साथ देवी का कपाल बाहर निकला, गाएं भागने लगी तब ग्वाला ने कहा- माता ढबजा। उसके कहने से भगवती का कपाल ही बाहर आया। उस समय गायों के दूध से उसका अभिषेक किया गया। आज भी पूरे भारत में यह दधिमथी माता का एक ही मंदिर है, जहां दूध से अभिषेक होता है।

पूजा, उत्सव और मेले

मंदिर के चौक में से शिव परिवार व हनुमान जी की प्रतिमाएं स्थापित हैं। मंदिर का शिखर बहुत ऊंचा है तथा यहां अधर-खम्भ की महिमा है। जिस दिन ये दोनो पाट बराबर चिपक जाएंगे, उस दिन प्रलय की स्थिति होगी। गर्भगृह में विभिन्न प्रकार की मूर्तियां लगी हुई है। यहां प्रत्येक नवरात्रों में चैत्र व आसोज में मेला लगता है, जो पूरे नौ दिनो तक चलता है। इसमें पूरे भारत-वर्ष के दाधीच बन्धुओं के अलावा सभी वर्गों के लोग आकर मां के दर्शन करते हैं। नवरात्रों के अलावा कार्तिक सुदी अष्टमी, गोपाष्टमी को अन्नकूट महोत्सव व माघ सुदी सप्तमी को प्राकट्य दिवस मनाया जाता है। वर्ष भर दर्शनार्थी आते हैं।

इस मंदिर की सेवा-पूजा पहले दाधीच ब्राह्मण करते थे, लेकिन कुछ समय बाद पास के गांव दुस्ताऊ के पाराशर ब्राह्मणों को बारी-बारी से सेवा-पूजा के लिए अधिकृत किया, जिसका उनको मंदिर समिति की ओर से पारिश्रमिक दिया जाता है। मंदिर की व्यवस्था हेतु जागीरदारों द्वारा जमीन दी गई, जिसके लगान के रूपये माताजी के मंदिर को मिलते हैं। यहां आस-पास जिप्सम निकलती है, उसके लगान के रूपये भी माताजी के मंदिर को मिलते थे, जो आजादी मिलने के बाद खनिज विभाग ने लगान बंद कर दिया।

मंदिर-स्थल की व्यवस्थाएं और आवागमन

यात्रियों के ठहरने के लिए यहां कमरे आदि का निर्माण हुआ है, पास में दधिमथी सेवायतन नाम से धर्मशाला भी बनाई गई है। मंदिर का जीर्णोद्धार करार्य चल रहा है, उसमें निज मंदिर का जीर्णोद्धार पूरा हुआ है। उसमें करीब एक करोड़ रूपये खर्च हुए हैं। यह खर्च अधिकांश दाधीच ब्राह्मणों ने मिलकर किया है। अन्य कार्य हेतु भारत सरकार व राजस्थान सरकार के पुरातत्व विभाग के सहयोग से किया जायेगा। यहां पिछले कई वर्षों से वेद विद्यालय भी चल रहा है, जिसमें ब्राह्मण वर्ग के बालक शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इसका संचालन आचार्य श्री किशोर जी व्यास वेद प्रतिष्ठान पूना द्वारा किया जा रहा है।

मंदिर में पहुंचने के लिए विभिन्न स्थानों से रेल, बस, टैक्सी आदि से आसानी से पहुंचा जा सकता है। जयपुर, जोधपुर, अजमेर, बीकानेर,दिल्ली, नागौर से डेगाना, छोटी खाटु आदि से रेल द्वारा और उसके बाद टेक्सी या बस द्वारा पहुंचा जा सकता है।

मंदिर की सम्पूर्ण व्यवस्था मंदिर प्रन्यास व अखिल भारतीय दाधीच ब्राह्मण महासभा द्वारा की जाती है।

दघिमती माता के बारे में पौराणिक कथा

श्री दुर्गाशप्तशती मार्क ण्डेय पुराण का ही एक प्रमुख अंश है। इसमें देवी भगवती दुर्गा की कथा विस्तृत रूप में वर्णित है। इसमें देवी ने कहा है कि जब जब संसार में दानवी बाधा उपस्थित होगी, अत्याचार बढेगा, धर्म की हानि होगी, हिंसा का प्रभाव बढेगा, तब-तब साधु-संतों की रखा, दुष्टों का संहार, वेदों का संरक्षण करने के लिए मैं प्रत्येक युग में ईश्वरीय शक्ति का अवतार लूंगी।

इत्थ यदा यदा बाधा दानवी स्था भविष्यति।

तदा तदावतीर्या हं करिष्याम्यरि संक्षयम्।

या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थितो।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।

प्राचीनकाल में महा-बलवान देवता राक्षसों से अमृत लेने के लिए समुद्र-मंथन में असमर्थ हुए, तब महामाया भगवती की प्रार्थना की। तभी विराट् रूप में महामाया प्रकट हुई और उसी दिन से ब्रह्मा ने कहा कि दधिमन्थन के कारण तुम दधिमथी के नाम से प्रसिद्ध होगी। विष्णु तेरे पति, अथर्वा मुनि तेरे पिता, दधिची तेरे भाई व अथर्वा-पुत्र दधिची के पुत्रों की कुलदेवी होगी।

दधिमती का पूजन

दधिमती का पूजन दधिमती मंत्र के यंत्र द्वारा किया जाता है-

ऊँ ह्रीं श्रीं ऐं क्लीं सौ: भगवते दधिमथ्यै नम:

भारतीय संस्कृति में शक्ति को देवी अर्हता प्राप्त है।

दधिमथ्यै नमस्तुभ्यं

नमस्यै लोकधारिणी।

विश्वेश्वारि नमस्तुभ्यं

नमोथर्वण कन्य के।।

लेखक:- देवदत्त शर्मा (छोटी खाटु वाले), जयपुर


Saturday, August 8, 2015

राजस्थानी लुगाई

गांव में एक लुगाई बुहारी निकाळ रैयी थी ।चौक में उण
रो धणी बैठ्यो थो। बा बुहारी काडती-काडती उणरै कनै आई
तो बोली, 'परै सी सरकियो ।'
आदमी उठकै पौळी में आगो। लुगाई भी बुहारी काडती-
काडती पौळी में आगी और धणी नै बोली, 'आगै नै
सरकियो दिखां ।'
आदमी बारलै चौक में आगो। थोड़ी ताळ पछै बठै भी आगै
सरकणै की बात कैयी । बो उठकै घरां रै बारणै दरूजै पर
आगो अर चबूतरै पर बैठगो । लुगाई बुहारती-बुहारती घरां कै
बारै आई तो पति नै बोली, 'सरकियो दिखां।'
आदमी आखतो होय'र मुंबई चल्यो गयो । बठै सूं
चिट्ठी लिखी- 'अब भी तेरै अड़ूं हूं कै और आगै सरकूं? आगै
समंदर है, देख लिए।'

Wednesday, August 5, 2015

मारवाङी दोहा :---

दूहा 
औ बागड़, औ बेकरौ गोरड़ियां-रा गाम। 
वीजाणंद मिलिया-तणी, हियै रहेसी हाम।।1।। 
बूठै वेली थाई बरखा रति वरखा-सणी। 
तेतलियूं तन मांहि बावेग्यौ वीजाणदी।।2।। 
वीजाणंदी वलेह वले काइ बैसानरै। 
त्रीजे ताली देह दांत सकी दाखिसै नहीं।।3।। 
डर डूंङ्री चढेह जीविस तां जोइस घणौ। 
वीजाणंदी वलैह भांछडियो भेटिस नहीं।।4।। 
लाखां मिलिया लोइ मन बीजा मानै नहीं। 
तूंबडियालै तोइ व्रव लागीं वीजाणंदै।।5।। 
किण महुरत कहियांह वारिया कवि वीजाणंदै। 
वातां विच रहियांह सिरे न चढियां सूरउत।।6।। 
भणिज्यौ भाछलियाह संदेसी सयणी-तणी। 
जीवन जमवाराह रिध माडै रहिस्यै नहीं।।7।। 
कद हूं कवी कुमारड़ी कहि नै कदि परिणेसि। 
कद हूं वाजदि कोटड़ै वीजा-वहू कहेसि।।8।। 
कंइयां रहूं कुमारड़ी कइयां ह परिणेसि। 
सासू सदै आंगणै वीजा-बहू कहेसि।।9।। 
गात महाभड़ गालिया भड़ सारीखा भीम। 
सत विह-रौ सयणी कहै हिव् जाणीस्यै हीम।।10।। 
जो जाण हेड़ाउयां लागै इतरी दीह। 
चढियौड़ै सथै हुवा सरिसा बीजा सीह।।11।। 
वीजड़ घण सायालवी लागी पुडग मरांह। 
था-रै कारण साहिबा ! आडा वाण तिराह।।12।।

Saturday, August 1, 2015

चोमासो

सावन लाग्यो भादवो जी

यो तो बरसन लाग्यो मेह , बनिसा

मोरीया रे झट चौमासो लाग्यो रे झट सियाळो लाग्यो रे

झट चौमासो लाग्यो रे झट सियाळो लाग्यो रे

म्हारी द्योराणियां जेठाणियां रूसगी रे

म्हारा सासूजी बनाबा ने जाए, बनिसा

मोरीया रे झट चौमासो लाग्यो रे झट सियाळो लाग्यो रे

झट चौमासो लाग्यो रे झट सियाळो लाग्यो रे

उगण लागी बाजरी रे म्हारी उगन लागी बाजरी रे

म्हारी उगण लागी जवार , बनिसा

मोरिया रे झट चौमासो लाग्यो रे झट सियाळो लाग्यो रे

झट चौमासो लाग्यो रे झट सियाळो लाग्यो रे

काटूं मैं काटूं बाजरी रे म्हारी काटूं मैं काटूं बाजरी रे

म्हारी काटूँ मैं काटूं जवार , बनिसा

मोरिया रे झट चौमासो लाग्यो रे झट सियाळो लाग्यो रे

झट चौमासो लाग्यो रे झट सियाळो लाग्यो रे

आळ्या में पड़गी बाजरी जी म्हारी आळ्या में पड़गी बाजरी जी

म्हारी कोठा में पड़गी जवार , बनिसा

मोरीया रे झट चौमासो लाग्यो रे झट सियाळो लाग्यो रे

झट चौमासो लाग्यो रे झट सियाळो लाग्यो रे

म्हारी द्योराणियां जेठाणियां रूसगी रे

म्हारा सासूजी मनाबा ने जाए , बनिसा

मोरिया रे झट चौमासो लाग्यो रे सियाळो लाग्यो रे

झट चौमासो लाग्यो रे सियाळो लाग्यो रे........

झट चौमासो लाग्यो रे सियाळो लाग्यो रे..........